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Chhattisgarh High Court Rape Verdict: “Penetration जरूरी, बिना प्रवेश रेप नहीं” फैसले पर देशभर में बहस

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“योनि के ऊपर लिंग रखकर वीर्यपात करना बलात्कार नहीं” — छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला और उठते सवाल

न्याय के गलियारों से 16 फरवरी 2026 को आया एक फैसला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक पुराने मामले में सजा को संशोधित करते हुए कहा कि यदि पेनिट्रेशन (प्रवेश) साबित नहीं होता और केवल ऊपर रखकर वीर्यपात हुआ है, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत इसे बलात्कार नहीं माना जा सकता — बल्कि इसे “बलात्कार का प्रयास” की श्रेणी में रखा जाएगा।

📌 क्या कहा अदालत ने?

अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून की परिभाषा के अनुसार penetration बलात्कार का आवश्यक तत्व है। यदि योनि में प्रवेश सिद्ध नहीं होता, तो अपराध को Attempt to Rape माना जाएगा। इसी आधार पर दोषी की सजा में कमी की गई।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला: “योनि के ऊपर लिंग रखकर वीर्यपात करना बलात्कार नहीं” — रेप केस में सजा बदली, महिला सुरक्षा पर बहस
16 फरवरी 2026 के फैसले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि penetration सिद्ध न होने पर अपराध को “बलात्कार” नहीं बल्कि “बलात्कार का प्रयास” माना जाएगा — फैसले के बाद देशभर में कानूनी और सामाजिक बहस तेज।


😔 लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं होते…

कानून की भाषा ठोस और स्पष्ट हो सकती है — लेकिन पीड़िता की पीड़ा, उसका भय, उसकी मानसिक चोट क्या सिर्फ शब्दों से मापी जा सकती है? क्या केवल “प्रवेश” की तकनीकी परिभाषा से न्याय का पूरा अर्थ तय हो जाता है? या फिर समाज को यह भी सोचना चाहिए कि महिला की गरिमा, उसकी सुरक्षा और उसका मानसिक आघात भी न्याय की कसौटी पर उतना ही महत्वपूर्ण है?

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यह फैसला कानून की व्याख्या है — लेकिन इसने समाज में एक गहरी बहस छेड़ दी है। कानून के शब्द और इंसान की संवेदनाएं — दोनों के बीच संतुलन कैसे बने? यही आज का सबसे बड़ा सवाल है।

रिजवान....✍️


Source: Indian Express, Times of India (Legal Reports)
Tags: Chhattisgarh High Court, Rape Law, IPC 375, Legal News, Women Safety

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