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वर्दी में इंसानियत की कीमत: जब बेटियों के सम्मान का पाठ बन गया 'जुर्म'
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| ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद आफाक खान (फोटो: सोशल मीडिया) |
कन्नौज (उत्तर प्रदेश): एक ऐसी घटना जो इस सरकार की दोहरी नीति और छोटी सोच को बेनकाब कर देती है। जब बेटियों के सम्मान की बात करना भी 'अपराध' बन जाए।
क्या था आफाक खान का 'कसूर'?
ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद आफाक खान का कसूर क्या था? उन्होंने एक स्कूल में यातायात जागरूकता कार्यक्रम के दौरान बेटियों की सुरक्षा और सम्मान की बात की। उन्होंने हजरत पैगंबर मोहम्मद (स.) की शिक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जिस घर में बेटी पैदा होती है, उस घर में रहमत बरसती है।
बस इतनी सी बात - और आफाक खान को लाइन हाजिर कर दिया गया। 9 दिसंबर को कन्नौज के आदर्श इंटर कॉलेज में दिए गए भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, और 15 दिसंबर को उन्हें निलंबित कर दिया गया।
⚠️ ध्यान दें: यातायात जागरूकता कार्यक्रम में बेटियों के सम्मान की बात करना 'धार्मिक उपदेश' मान लिया गया।
जब 'अपना' धर्म हो तो सब माफ
यह वही उत्तर प्रदेश है जहां कांवड़ यात्रा के दौरान वर्दी में पुलिसकर्मी कांवड़ियों के पैर धोते हैं। हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए जाते हैं, सड़कों पर पुष्प बिछाए जाते हैं। यहां संभल के CO अनुज चौधरी धार्मिक कार्यक्रम में गदा लेकर चलते हैं। वर्दी में धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होना, धार्मिक प्रतीक लेकर चलना - यह सब सामान्य है, स्वीकार्य है।
लेकिन जब एक मुस्लिम पुलिस अधिकारी बेटियों के सम्मान की बात करता है और अपने धर्म का संदर्भ देता है, तो यह "गैर-जिम्मेदारी" बन जाती है। 15 दिसंबर को बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने शिकायत की कि वर्दी में धार्मिक उपदेश देना गलत है। और बिना किसी देरी के, कन्नौज एसपी विनोद कुमार ने आफाक खान को निलंबित कर दिया।
⚖️ न्याय के दो पैमाने
| जब 'अपना' धर्म हो | जब 'दूसरा' धर्म हो |
|---|---|
| ✅ कांवड़ियों के पैर धोना - स्वीकार्य | ❌ बेटियों के सम्मान की बात - निलंबन |
| ✅ हेलीकॉप्टर से फूल बरसाना - देशभक्ति | ❌ धार्मिक संदर्भ देना - अपराध |
| ✅ वर्दी में गदा लेकर चलना - सामान्य | ❌ वर्दी में सकारात्मक संदेश - गलत |
दर्द जो दिल को चीर देता है
जिस देश में गांधी ने "सर्वधर्म समभाव" का सपना देखा था, वहां आज एक पुलिस अधिकारी बेटियों के सम्मान की बात करके निलंबित हो रहा है। जिस संविधान ने हर नागरिक को समान अधिकार दिए, वहां आज धर्म के नाम पर भेदभाव हो रहा है।
जब नफरत फैलाना 'धर्म प्रचार' हो
यह वही देश है जहां यति नरसिंहानंद जैसे लोग खुलेआम मुसलमानों के खिलाफ जहर उगलते हैं, उनके खिलाफ हिंसा की धमकी देते हैं, और सार्वजनिक मंचों से नफरत की भाषा बोलते हैं - लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।
🔴 यति नरसिंहानंद के विवादित बयान:
- मुस्लिम समुदाय के खिलाफ खुलेआम भड़काऊ भाषण
- धार्मिक संसद में घृणास्पद टिप्पणियां
- हिंसा की खुली वकालत और उकसावे
- संविधान और कानून की खुली अवमानना
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नतीजा? कोई निलंबन नहीं, कोई सख्त कार्रवाई नहीं। बल्कि उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिलता है। उनके कार्यक्रम धूमधाम से होते हैं, और वे "धर्म गुरु" बने घूमते हैं।
"जब नफरत फैलाना 'धर्म रक्षा' हो और इंसानियत सिखाना 'अपराध' - तो समझिए न्याय अंधा नहीं, पक्षपाती हो गया है!"
लेकिन आफाक खान ने बेटियों के सम्मान की बात की, और उन्हें तुरंत निलंबित कर दिया गया। यही है इस व्यवस्था का असली चेहरा - जहां जहर उगलने वाले सुरक्षित हैं, और प्यार फैलाने वाले खतरे में।
आफाक खान ने किसी के खिलाफ नहीं बोला। उन्होंने नफरत नहीं फैलाई। उन्होंने सिर्फ एक सार्वभौमिक संदेश दिया - बेटियों का सम्मान करो। यह संदेश हर धर्म में है, हर समाज को चाहिए। लेकिन इस देश में अब यह भी तय होने लगा है कि कौन क्या बोलेगा, और किस भाषा में बोलेगा।
"क्या यही है वह भारत जिसकी हम कल्पना करते थे? क्या यही है वह न्याय जिसका हम सपना देखते हैं?"
सोचिए और जवाब दीजिए
आफाक खान आज अपने घर में बैठे सोच रहे होंगे - क्या मैंने गलत किया? क्या बेटियों की इज्जत की बात करना गुनाह है? क्या मेरे धर्म का नाम लेना अपराध है?
और हम सब को भी सोचना चाहिए - क्या हम ऐसे भारत में जी रहे हैं जहां इंसानियत से बड़ा धर्म हो गया है? जहां सच बोलने की कीमत नौकरी से हाथ धोना है? जहां न्याय के दो पैमाने हैं - एक "अपनों" के लिए, एक "पराओं" के लिए?
📌 घटनाक्रम की मुख्य बातें:
- 9 दिसंबर: कन्नौज के आदर्श इंटर कॉलेज में यातायात जागरूकता कार्यक्रम
- विषय: बेटियों की सुरक्षा और सम्मान पर भाषण
- संदर्भ: हजरत पैगंबर मोहम्मद (स.) की शिक्षाओं का उल्लेख
- 15 दिसंबर: बजरंग दल और विहिप की शिकायत
- उसी रात: एसपी विनोद कुमार द्वारा निलंबन आदेश
- आरोप: वर्दी में धार्मिक उपदेश देना
आखिरी बात
यह घटना सिर्फ एक निलंबन की कहानी नहीं है। यह उस सोच की कहानी है जो इस देश को तोड़ रही है, बांट रही है। यह उस मानसिकता की कहानी है जो तय करती है कि कौन बोलेगा और क्या बोलेगा।
आफाक खान का निलंबन एक संकेत है - एक खतरनाक संकेत। यह बता रहा है कि इस देश में अब छोटी-छोटी बातों पर भी धार्मिक पहचान के आधार पर फैसले होंगे। यह चेता रहा है कि जो आज आफाक के साथ हुआ, कल किसी और के साथ हो सकता है।
"जिस दिन इंसानियत और बेटियों के सम्मान की बात करना 'जुर्म' बन जाए, समझ लीजिए कि समाज की आत्मा मर चुकी है।"
यह आर्टिकल उन सभी को समर्पित है जो मानते हैं कि धर्म से बड़ा इंसानियत है, और न्याय में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
रिपोर्ट: रिजवान
स्थान: कन्नौज, उत्तर प्रदेश
दिनांक: 18 दिसंबर 2025
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