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10 साल में 93,000 स्कूल बंद: शिक्षा पर ताला या भविष्य पर हमला?

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📚 10 साल में बंद हुए 93,000+ सरकारी स्कूल!
UP–MP सबसे ज़्यादा प्रभावित — शिक्षा सुधार या चुपचाप संकुचन?



देश में डिजिटल इंडिया, विश्वगुरु और न्यू एजुकेशन पॉलिसी की चर्चा के बीच एक सन्नाटा भी है — सरकारी स्कूलों का सन्नाटा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 वर्षों में 93,000 से अधिक सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं।

📊 राज्यवार आंकड़े (सबसे अधिक प्रभावित राज्य)

राज्य बंद हुए स्कूल (लगभग) स्थिति
उत्तर प्रदेश 24,590+ देश में सबसे अधिक
मध्य प्रदेश 22,438+ दूसरे स्थान पर
झारखंड 5,000+ ग्रामीण इलाकों में असर
ओडिशा 4,000+ स्कूल मर्जर नीति लागू
राजस्थान 3,000+ छोटे स्कूलों का विलय

मतलब ये भाजपा शासित राज्यों को स्कूल चाहिए ही नहीं।

सबसे बड़ा सवाल — जब आबादी कम नहीं हो रही, तो सरकारी स्कूल क्यों कम हो रहे हैं?

📉 2014–2020: सबसे बड़ा संकुचन

2014-15 से 2019-20 के बीच लगभग 70,000+ स्कूल बंद हुए। 2020 के बाद भी यह सिलसिला थमा नहीं।

बंद सरकारी स्कूल भारत में ग्रामीण इलाका


🎯 सरकार का तर्क बनाम जमीनी सच्चाई

सरकार का कहना है कि स्कूलों को मर्ज किया गया, ताकि संसाधन बेहतर हों। लेकिन ग्रामीण इलाकों में बच्चे अब 3-5 किलोमीटर दूर दूसरे स्कूल तक जाने को मजबूर हैं।

जहां पहले गांव के पास स्कूल था, अब वहां जंग लगा ताला और खाली कमरा है।

🔥 बड़ा सवाल 

अगर अनपढ़ रहेगा भारत, तो सवाल कम पूछेगा भारत। अगर सवाल कम पूछेगा भारत, तो खामोश रहेगा भारत। और अगर खामोश रहेगा भारत, तो सिर्फ़ वोट बैंक बनेगा भारत।

क्या यही “नया मॉडल” है? स्कूल बंद, निजीकरण बढ़े, और शिक्षा बाज़ार के हवाले?

📌 निष्कर्ष

93,000 स्कूलों का बंद होना केवल एक सरकारी फाइल का आंकड़ा नहीं — यह लाखों बच्चों के भविष्य का सवाल है। सरकार से जवाब मांगना लोकतंत्र की बुनियादी जिम्मेदारी है।

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Source Reference: लोकसभा में शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत आंकड़े (2014-15 से 2024-25)।

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