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NCERT कक्षा 3 की किताब पर ‘लव जिहाद’ का झूठा नैरेटिव: NBDSA ने न्यूज़ चैनलों को लगाई फटकार

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NCERT की कक्षा 3 की किताब पर ‘लव जिहाद’ का शोर — NBDSA की फटकार, वीडियो हटाने के आदेश

पिछले साल NCERT की कक्षा 3 की एक पाठ्यपुस्तक का अध्याय अचानक सुर्खियों में आ गया। कुछ टीवी न्यूज़ चैनलों ने इसे कथित तौर पर “लव जिहाद की साज़िश” बताकर पेश किया। बिना ठोस तथ्यों, संदर्भ और शैक्षणिक उद्देश्य को समझे की गई यह ब्रॉडकास्टिंग, न्यूज़ एथिक्स और ब्रॉडकास्ट के मूलभूत सिद्धांतों का खुला उल्लंघन थी।

क्या था विवाद?

जिस अध्याय को लेकर हंगामा खड़ा किया गया, वह बच्चों के लिए तैयार शैक्षणिक सामग्री का हिस्सा था। लेकिन चुनिंदा शब्दों और संदर्भों को तोड़–मरोड़ कर टीवी डिबेट्स में इसे सांप्रदायिक एंगल दिया गया। नतीजा—भ्रामक नैरेटिव, डर फैलाने वाली हेडलाइंस और तथ्यहीन आरोप।



NBDSA का हस्तक्षेप

इस मामले में NBDSA (News Broadcasting & Digital Standards Authority) ने संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी कवरेज:

  • संतुलन और निष्पक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है
  • बच्चों की पाठ्य सामग्री को राजनीतिक/सांप्रदायिक रंग देना अस्वीकार्य है
  • दर्शकों को गलत सूचना के ज़रिये गुमराह करता है

NBDSA ने संबंधित चैनलों को आपत्तिजनक वीडियो हटाने का आदेश दिया—जो भारतीय ब्रॉडकास्टिंग में जवाबदेही की एक अहम मिसाल है।

ऑल्ट न्यूज़ की फैक्ट–चेक रिपोर्ट

ऑल्ट न्यूज़ की विस्तृत रिपोर्ट बताती है कि कैसे:

  • पाठ्यपुस्तक के कंटेंट को गलत तरीके से व्याख्यायित किया गया
  • एडिटोरियल जिम्मेदारी की अनदेखी हुई
  • तथ्य–जांच के बिना संवेदनशील दावे प्रसारित किए गए

👉 देखिए ऑल्ट न्यूज़ की रिपोर्ट — जहाँ पूरे प्रकरण को दस्तावेज़ों, संदर्भों और नियमों के साथ समझाया गया है।

क्यों ज़रूरी है यह मामला?

यह प्रकरण याद दिलाता है कि:

  • शिक्षा को राजनीतिक सनसनी से दूर रखना ज़रूरी है
  • मीडिया की विश्वसनीयता तथ्य–जांच और संतुलन से बनती है
  • नियामक संस्थाओं की भूमिका लोकतंत्र में कितनी अहम है

निष्कर्ष: बच्चों की किताबों को नफरत या साज़िश के फ्रेम में पेश करना न सिर्फ़ गलत है, बल्कि समाज के लिए नुकसानदेह भी। NBDSA का आदेश और ऑल्ट न्यूज़ की फैक्ट–चेक—दोनों मिलकर जिम्मेदार पत्रकारिता की दिशा दिखाते हैं।


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