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मोदी सरकार से आगे योगी सरकार: 8 सालों में विज्ञापन पर खर्च किए ₹6,811 करोड़, दैनिक औसत ₹2.32 करोड़

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मोदी सरकार से आगे योगी सरकार? 8 साल में विज्ञापनों पर ₹6,811 करोड़ खर्च का दावा, विपक्ष ने उठाए सवाल

नई दिल्ली/लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार के पिछले 8 वर्षों में विज्ञापनों पर ₹6,811 करोड़ खर्च किए जाने के दावे पर राजनीतिक बहस तेज। जानिए क्या हैं आंकड़े, सरकार का पक्ष और विपक्ष के सवाल।है.

JUMLA TIMES DESK   |   लखनऊ 






खबर की मुख्य बातें
● 8 वर्षों में कुल विज्ञापन खर्च: ₹6,811 करोड़
● प्रतिदिन औसत खर्च: लगभग ₹2.32 करोड़
● इन आंकड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

न्यूजलॉन्ड्री की एक हालिया रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार के वित्तीय दस्तावेजों के विश्लेषण के हवाले से यह दावा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2017-18 से लेकर वित्त वर्ष 2024-25 के बीच, योगी सरकार ने विज्ञापन और प्रचार पर कुल 6,811.94 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. अगर इस कुल राशि को दिनों के हिसाब से देखा जाए, तो यह आँकड़ा औसतन 2.32 करोड़ रुपये प्रतिदिन बैठता है.

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि राज्य सरकार का यह दैनिक औसत खर्च, केंद्र सरकार के विज्ञापन खर्च से अधिक है. हालाँकि, रिपोर्ट में केंद्र सरकार के ख़र्च की कोई विशेष समयावधि या आँकड़े स्पष्ट नहीं किए गए हैं.

​सरकारी विज्ञापन अक्सर चर्चा का विषय रहते हैं, और इन पर होने वाले खर्च को लेकर बहस होती रहती है. जहाँ एक ओर सरकारें अपनी उपलब्धियों और योजनाओं को जनता तक पहुँचाने के लिए इसे ज़रूरी मानती हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और नागरिक समूह अक्सर इसे जनता के पैसे का दुरुपयोग बताकर आलोचना करते हैं. यह रिपोर्ट इसी बहस को एक नया मोड़ दे सकती है.


विपक्ष के आरोप
विपक्षी दलों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर किया जा सकता था। उनका आरोप है कि सरकारी उपलब्धियों के प्रचार पर अत्यधिक खर्च किया गया।

सरकार का पक्ष

सरकार और भाजपा का कहना है कि सरकारी योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनका तर्क है कि विज्ञापनों के माध्यम से करोड़ों लोगों को सरकारी योजनाओं, सुविधाओं और जनहित कार्यक्रमों की जानकारी मिलती है, जिससे लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच बढ़ती है।


Jumla Tiimes 

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