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छात्रों को थप्पड़ मारकर चर्चा में आया सत्यम पंडित, अब खुली पुरानी फाइल तो सामने आया चौंकाने वाला रिकॉर्ड!

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CATEGORY: Crime & Politics   |   LOCATION:  गाजियाबाद / नई दिल्ली दिल्ली   |   Jumla Times Digital Edition संपादक रिजवान अहमद

छात्रों से मारपीट के बाद खुली सत्यम पंडित की ‘कुंडली’, तीन साल में कम से कम 8 FIR; मारपीट से भड़काऊ बयान तक के आरोप

वायरल वीडियो के बाद पुराने मामलों की चर्चा तेज; मीडिया रिपोर्ट में मारपीट, तोड़फोड़ और कथित भड़काऊ बयान समेत कई मामलों का जिक्र।
JUMLA TIMES DESK   |   रिपोर्ट
सत्यम पंडित से जुड़े पुराने मामलों और वायरल वीडियो की खबर
सत्यम पंडित का वायरल वीडियो सामने आने के बाद उसके पुराने मामलों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
वायरल वीडियो के बाद चर्चा में सत्यम पंडित का पुराना रिकॉर्ड
● मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सत्यम पंडित के खिलाफ गाजियाबाद में कम से कम 8 FIR दर्ज हैं।
● पुराने मामलों में मारपीट, तोड़फोड़ और कथित भड़काऊ बयान जैसे आरोप शामिल बताए गए हैं।
● हालिया वायरल वीडियो के बाद उसका पुराना पुलिस रिकॉर्ड फिर चर्चा में आया है।



गाजियाबाद/नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए CJP से जुड़े प्रदर्शन में शामिल दो युवकों से कथित मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद चर्चा में आए सत्यम पंडित को लेकर अब उसके पुराने पुलिस रिकॉर्ड पर भी सवाल उठ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गाजियाबाद में पिछले करीब तीन वर्षों के दौरान सत्यम पंडित का नाम कम से कम आठ FIR में दर्ज हुआ है। इन मामलों में मारपीट, तोड़फोड़, कथित भड़काऊ बयान और मीट विक्रेताओं से जुड़े विवादों जैसे आरोप शामिल बताए गए हैं। �

क्या है पूरा मामला?

वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद

हालिया वीडियो में सत्यम पंडित कथित तौर पर दो युवकों से उनका नाम, धर्म और जंतर-मंतर प्रदर्शन में जाने की वजह पूछता दिखाई देता है। वीडियो में युवकों को धमकाने और एक युवक को थप्पड़ मारने के दृश्य भी सामने आए। इस घटना के बाद विपक्षी नेताओं ने कार्रवाई की मांग की। सत्यम ने बाद में मारपीट का बचाव करते हुए दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने भगवान राम को लेकर आपत्तिजनक नारे लगाए थे। �

हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार घटना के बाद रविवार तक दिल्ली पुलिस को कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी और इसी कारण उस समय इस घटना को लेकर FIR दर्ज नहीं की गई थी। �

पुलिस रिकॉर्ड में कम से कम 8 FIR
मामला सिर्फ इस वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है। Times of India की 27 जुलाई की रिपोर्ट में पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर कहा गया है कि सत्यम पंडित के खिलाफ गाजियाबाद में कम से कम आठ FIR दर्ज हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक पहला मामला जून 2022 में सिहानी गेट थाने में दर्ज हुआ था, जिसमें एक दुकानदार के साथ कथित मारपीट और उसकी दुकान में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया गया था। �
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2024 में भड़काऊ बयान के मामले में गिरफ्तारी

अगस्त 2024 में सत्यम पंडित के खिलाफ एक विवादित वीडियो को लेकर पुलिस कार्रवाई हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक बांग्लादेशियों और रोहिंग्या समुदाय को लेकर कथित भड़काऊ बयान वाला वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। उस समय की मीडिया रिपोर्ट भी इस गिरफ्तारी की पुष्टि करती है। �

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फरवरी 2026 में मीट विक्रेताओं से जुड़ा मामला

इसी साल फरवरी में सत्यम पंडित फिर विवादों में आया। Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को मीट की दुकानें बंद कराने के अभियान के दौरान विक्रेताओं से कथित मारपीट के आरोप में गाजियाबाद पुलिस ने उसके खिलाफ FIR दर्ज की थी। इससे जुड़े एक वायरल वीडियो में मंगलवार को मीट की दुकान खोलने पर आग लगाने की धमकी देने का मामला भी सामने आया था। �

The Times of India +1

सवाल सिर्फ वायरल वीडियो का नहीं

सत्यम पंडित खुद को हिंदू वीर सेना का अध्यक्ष बताता है। अब छात्रों से कथित मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद उसके पुराने मामलों की चर्चा फिर तेज हो गई है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी सिद्ध होने के बराबर नहीं है। किसी मामले में अपराध साबित हुआ या नहीं, इसका फैसला अदालत करती है। इसलिए सोशल मीडिया पर घूम रही कथित “आपराधिक कुंडली” की हर धारा और हर दावे को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। फिलहाल विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टिंग से कम से कम आठ FIR और ऊपर बताए गए कुछ मामलों की पुष्टि होती है। �

Jumla Times का सवाल
सवाल यह है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ पहले से इतने मामले दर्ज बताए जा रहे हैं, वह खुलेआम दो युवकों से उनका नाम और धर्म पूछकर उन्हें धमकाता और कथित तौर पर मारता हुआ वीडियो कैसे बना रहा है?
और दूसरा सवाल प्रशासन से—पुराने मामलों में कार्रवाई आखिर किस स्थिति में है?
कानून का मतलब तभी है जब वह व्यक्ति की विचारधारा, संगठन और पहचान देखकर नहीं, बल्कि उसके कृत्य देखकर लागू हो।
Jumla Times — हर जुमले पर पैनी नज़र।
संपादकीय नोट: Jumla Times उपलब्ध सूचनाओं, आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर खबर प्रस्तुत करता है। आरोपों से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित अदालत का होता है।
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