🗞️ Times Watch देश दुनिया – विशेष रिपोर्ट
📅 January 8, 2026 | Morning Edition
MGNREGA से VB-G RAM G तक: कैसे सरकार ने ग्रामीण रोजगार की “गारंटी” का असली मतलब बदल दिया
🪶 सारांश
भारत की सबसे प्रसिद्ध ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना MGNREGA को VB-G RAM G नाम के नए कानून से बदल दिया गया है। सरकार इसे “ग्रामीण रोज़गार और आजीविका मिशन” कह रही है, लेकिन इस बदलाव के साथ रोज़गार की कानूनी गारंटी का स्वरूप बदल गया है — और यही वह चूक है जिसे देश के सामने लाना ज़रूरी है।
📌 क्या है VB-G RAM G?
VB-G RAM G Act, 2025 (Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission, Gramin) को संसद ने दिसंबर 2025 में पास कर दिया है। यह कानून MGNREGA (2005) को पूरी तरह से बदल देता है — और नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों तक की रोजगार व्यवस्था देने का दावा किया गया है।
सरकार का कहना है कि यह बदलाव ग्रामीण रोजगार को एक “मिशन” और विकास-केंद्रित ढांचे में लाता है, जिससे काम के साथ साथ ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण भी होगा।
📉 पहले और अब: बड़ा फर्क
✅ MGNREGA का मूल स्वरूप
👉 MGNREGA एक कानूनी अधिकार-आधारित योजना थी —
✔️ हर ग्रामीण परिवार को 100 दिन का अकुशल श्रम
✔️ काम न मिले तो बेरोज़गारी भत्ता देना केंद्र की जिम्मेदारी
✔️ कोर्ट में मांग कर हक़ पाना संभव
✔️ केंद्र सरकार ज़्यादातर खर्च उठाती थी, बिना राज्यों पर ज़ोर डाले
यह योजना गरीबों के लिए जीवन सुरक्षा का अधिकार बनकर उभरी थी।
🎭 VB-G RAM G की असलियत
✔️ 100 दिन के बजाय 125 दिन रोजगार का दावा
✔️ कानून तो नया है, मगर यह MGNREGA की “गारंटी” को बदल देता है
✔️ अब केंद्र-राज्य फंडिंग शेयर 60:40 या 90:10 के हिसाब से तय होगा
✔️ नॉर्मेटिव बजट आवंटन का नियम — यानी तय राशि के बाहर खर्च राज्य को उठाना है
✔️ कृषि मौसम के दौरान तय दिनों तक काम रोकने का प्रावधान भी है
✔️ कार्य योजनाएँ पंचायत के बजट और प्रोजेक्ट्स के अनुसार तय होंगी
ये बदलाव रोज़गार को पहले जैसी डिमांड-बेस्ड कानूनी गारंटी नहीं रहने देते।
📌 सरकार की दलील बनाम विपक्ष का आरोप
🟦 सरकार का पक्ष
केंद्र कहता है कि यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, रोजगार के साथ आजीविका और बुनियादी ढांचा भी देगा।
125 दिनों का रोजगार स्तर बढ़ाकर, तकनीक-आधारित मॉनिटरिंग और पंचायत-स्तर के योजनाओं के ज़रिये ग्राम विकास का वादा किया गया है।
🟥 विपक्ष की आवाज़
विपक्ष और आलोचक इसे MGNREGA के मूल अधिकारों को कमजोर करना बता रहे हैं।
- Mahatma Gandhi के नाम को हटाना
- काम की गारंटी को कानूनी हक़ से हटाकर बजट-निर्धारित करने जैसा करना
- राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ाना
इन सबको “सरकार की चालाकी” माना जा रहा है।
📊 मुख्य बदलाव — तुलनात्मक रूप से
| फ़ीचर | MGNREGA | VB-G RAM G |
|---|---|---|
| गारंटी स्वरूप | कानूनी अधिकार (Legal Right) | बजट-आधारित प्रावधान |
| काम की संख्या | 100 दिन | 125 दिन |
| फंडिंग | 100% केंद्र | 60:40 / 90:10 केंद्र-राज्य |
| काम की मांग | डिमांड-बेस्ड | नॉर्मेटिव बजट-ड्रिवन |
| कानून का स्वरूप | सामाजिक सुरक्षा का अधिकार | “मिशन” और प्रोजेक्ट-आधारित विकास |
| राजनैतिक आलोचना | न्यून | बेहद तीव्र |
| Sources: PIB, वजीरम/द बेटर इंडिया, विकिपीडिया |
🧠 दूरगामी असर क्या हो सकता है?
🔹 पहले ग्रामीण मजदूर काम मांग कर हक़दार थे।
🔹 अब उनकी नौकरी की सुरक्षा इसी बात पर निर्भर रहेगी कि बजट कितना आवंटित हुआ, योजना कैसे चलती है और पंचायत किस तरह निष्पादित करती है।
बीते वर्षों में MGNREGA ने गरीबी घटाई, महिला सशक्तिकरण में मदद की, पलायन कम किया, लेकिन अब यह एक विकास- आधारित मिशन में बदल दिया गया है, जो Navarra और Kritikon के नजरिए से “हक़ से सुविधा में” परिवर्तन है।
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🧾 निष्कर्ष:
❗ यह सच है कि VB-G RAM G नाम का नया ढांचा आया है और रोजगार के दिनों को बड़ा कर 125 कर दिया गया है —
❗ लेकिन यह भी सच है कि पहले जैसा कानूनी अधिकार अब कमजोर हुआ है।
❗ MGNREGA का नाम, स्वरूप और बैंक-ऑफ-राइट बदलकर एक नई नीति के रूप में पेश किया गया है।
यह बदलाव केवल नाम की चालाकी नहीं — बल्कि ग्रामीण रोजगार की नींव को नया रूप देने वाला बड़ा बदलाव है, जो भारत के करोड़ों मज़दूरों की रोज़गार सुरक्षा पर असर डाल सकता है।

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