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पार्टी बदली, विचार बदले? कपिल मिश्रा का पुराना बयान और सच का असहज सवाल

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🔴 पार्टी बदली, विचार बदले? कपिल मिश्रा का पुराना बयान और सच का असहज सवाल

Search Description: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कपिल मिश्रा के पुराने वीडियो ने एक बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया है—क्या पार्टी बदलते ही इंसान का सच भी बदल जाता है? प्रधानमंत्री मोदी और कथित जासूसी से जुड़े इस बयान के ज़रिए आज की राजनीति पर बड़ा सवाल।

रिज़वान की क़लम से—
राजनीति में बयान पुराने हो सकते हैं, लेकिन सवाल कभी पुराने नहीं होते। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा कपिल मिश्रा का यह वीडियो भी ऐसा ही एक सवाल लेकर सामने आया है— क्या सच वही होता है जो सत्ता के साथ चलता है? या फिर सच सच ही रहता है, चाहे उसे कहने वाला किसी भी पार्टी में क्यों न हो?

स्रोत: INC / Congress समर्थित YouTube हैंडल से वायरल पुराना वीडियो

📌 वीडियो क्या कहता है?

इस वायरल क्लिप में कपिल मिश्रा खुलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हैं और एक महिला की कथित जासूसी के आरोप का ज़िक्र करते हैं। यह कोई फुसफुसाया हुआ आरोप नहीं, बल्कि कैमरे के सामने, सार्वजनिक मंच से कही गई बात है।

यह बयान उस दौर का बताया जाता है जब कपिल मिश्रा आम आदमी पार्टी में थे। तब यह बात राजनीतिक हमला मानी गई, लेकिन आज वही बयान एक अलग रोशनी में देखा जा रहा है।

❓ असली सवाल: कपिल मिश्रा सही कब थे?

यहीं से असहज सवाल पैदा होता है—

  • क्या कपिल मिश्रा तब सही थे, जब वे प्रधानमंत्री पर खुलकर आरोप लगा रहे थे?
  • या वे अब सही हैं, जब उनकी राजनीति की दिशा पूरी तरह बदल चुकी है?
  • क्या पार्टी बदलते ही इंसान की विचारधारा बदल जाती है?
  • और अगर विचारधारा बदलती है, तो क्या सच भी बदल जाता है?

यह वीडियो किसी अफ़वाह का हिस्सा नहीं है। यह वही शब्द हैं, वही आवाज़ है, वही चेहरा है। बदला है तो सिर्फ़ समय और राजनीतिक ठिकाना।

अगर यह बयान तब गलत था, तो गलत क्यों था—इसका जवाब कौन देगा? और अगर यह बयान तब सच था, तो आज उस सच का क्या हुआ?

🧠 राजनीति और सुविधा का रिश्ता

भारतीय राजनीति में यह कोई नया दृश्य नहीं है। पार्टी बदलने के साथ ही—

  • पुराने आरोप ‘भूल’ बन जाते हैं
  • पुराने सवाल ‘गैर-ज़रूरी’ हो जाते हैं
  • और पुरानी बातें ‘संदर्भहीन’ कहलाने लगती हैं

लेकिन वायरल वीडियो याद दिलाता है कि सच को पूरी तरह मिटाया नहीं जा सकता— वह कभी न कभी लौटकर सवाल बन जाता है।

📝 निष्कर्ष

यह लेख किसी पार्टी का बचाव नहीं करता, और न ही किसी पार्टी पर फैसला सुनाता है।

यह लेख सिर्फ़ इतना पूछता है— क्या सच सत्ता का मोहताज होता है?
और अगर नहीं, तो फिर इस वीडियो में कहा गया सच आज इतना असहज क्यों लगता है?

Labels: Kapil Mishra, Viral Video, Political Opinion, Indian Politics, Old Statement, Truth vs Power

Photo Suggestion: Kapil Mishra speaking at a microphone
Alt Text: Kapil Mishra old viral statement video
Title Text: Kapil Mishra and the question of political truth

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