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315 का ढोल, 65 लाख की चुप्पी: बिहार SIR या लोकतंत्र की सुनियोजित बेदखली?

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315 का ढोल, 65 लाख की लाशें: यह SIR नहीं, लोकतंत्र का साइलेंट मर्डर है

Bihar SIR में 65 लाख वोट काटे गए। घुसपैठिए बताए गए 315 — जिनमें 78 मुसलमान। सवाल यह नहीं कि 78 कौन थे, सवाल यह है कि 65 लाख कौन थे?


देश को डराया गया। टीवी स्टूडियो गरजते रहे। माइक पर एक ही शब्द चिल्लाया गया —

घुसपैठिए!

और फिर जब पर्दा उठा, तो सामने आया आंकड़ा —

315

हाँ, सिर्फ 315


315 में से 78 मुसलमान — और फिर?

इन 315 में से 78 मुसलमान बताए गए।

बस यहीं कहानी खत्म कर दी गई।

टीवी चैनलों को मसाला मिल गया था, राजनीति को नारा मिल गया था, और भीड़ को दुश्मन मिल गया था।

लेकिन कोई यह पूछने नहीं आया कि —

अगर घुसपैठिए 315 थे, तो वोट 65 लाख क्यों काटे गए?


65 लाख — कोई गलती नहीं, एक फैसला

65 लाख नाम कटना कोई तकनीकी भूल नहीं होती।

यह न तो कंप्यूटर एरर है, न ही फॉर्म भरने की मामूली चूक।

65 लाख नाम कटना —

  • एक नीति है
  • एक रणनीति है
  • और एक राजनीतिक निर्णय है

क्योंकि अगर सच में मकसद घुसपैठ रोकना होता, तो सूची में से 315 हटते —

65,00,000 नहीं।

“Bihar SIR voter list controversy showing 315 alleged infiltrators versus 65 lakh deleted voters, raising questions on democracy and voting rights in India”



78 पर कैमरा, 65 लाख पर पर्दा

पूरे देश को बताया गया — “78 मुसलमान घुसपैठिए!”

लेकिन यह नहीं बताया गया कि —

बाकी 64,99,922 कौन थे?

क्या वे सब विदेशी थे? क्या वे सब देशद्रोही थे?

या वे वही लोग थे —

  • जो मजदूरी के लिए दूसरे राज्य चले जाते हैं
  • जो गरीब हैं, अनपढ़ हैं
  • जो नोटिस पढ़ ही नहीं पाए
  • जो सिस्टम के लिए सिर्फ एक नंबर हैं

यह घुसपैठ नहीं, वोट से बेदखली है

इस पूरी कवायद में घुसपैठ सिर्फ एक शब्द था —

असल काम था —

मताधिकार से बेदखल करना।

जिसका वोट नहीं रहेगा, उसकी आवाज़ भी नहीं रहेगी।

और जिसके पास आवाज़ नहीं, उस पर शासन करना सबसे आसान होता है।


आज 65 लाख, कल कौन?

आज अगर 65 लाख वोट चुपचाप काटे जा सकते हैं, तो कल —

  • आपका नाम
  • आपके घर का नाम
  • आपकी पहचान

सब कुछ एक क्लिक में गायब किया जा सकता है।

और तब आपको बताया जाएगा —

“यह तो प्रक्रिया थी।”


यह लेख 315 पर नहीं,

यह लेख उस 65 लाख पर है —

जिन्हें बिना शोर, बिना बहस, बिना जवाब लोकतंत्र से बाहर कर दिया गया।


— रिज़वान की क़लम से
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