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बिहार में आचार संहिता के बावजूद मुसलमानों के खिलाफ नफरत! आरफा खानम शेरवानी का बड़ा सवाल

📰 Times Watch देश दुनिया 

बुधवार, 22 अक्टूबर 2025 | शाम 6:40 IST

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🗳️ बिहार चुनाव 2025

बिहार में 'आचार संहिता' लागू है, लेकिन नरेंद्र मोदी की पार्टी मुसलमानों के खिलाफ़ थोक में नफ़रत बोट रही है!

चुनाव आयोग मर गया? - पत्रकार आरफा खानम शेरवानी का सवाल

संवाददाता: Times Watch News ब्यूरो | स्थान: पटना, बिहार

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच पुरस्कार विजेता पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने आदर्श आचार संहिता के बावजूद मुस्लिम मतदाताओं के खिलाफ नफरत फैलाने और चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

"बिहार में 'आचार संहिता' लागू है लेकिन नरेंद्र मोदी की पार्टी मुसलमानों के खिलाफ़ थोक में नफ़रत बोट रही है! चुनाव आयोग मर गया?"

— आरफा खानम शेरवानी, पत्रकार

🔴 गिरिराज सिंह का विवादित बयान

बिहार में 6 अक्टूबर 2025 से आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 18 अक्टूबर को अरवल की चुनावी रैली में मुस्लिम समुदाय को "नमक हराम" और "गद्दार" कहा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भाजपा को "नमक हरामों के वोट नहीं चाहिए"।

गिरिराज सिंह ने एक मौलवी के साथ कथित बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि मुस्लिम मतदाताओं ने सरकारी योजनाओं का लाभ लिया लेकिन भाजपा को वोट नहीं दिया। इस बयान पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

Arfa Khanum Sherwani, senior editor of The Wire, an Indian journalist and political commentator"
Arfa Khanum Sherwani, वरिष्ठ पत्रकार और द वायर की वरिष्ठ संपादक, बिहार चुनाव 2025 पर रिपोर्टिंग करते हुए"

📊 बिहार में मुस्लिम मतदाताओं का महत्व

बिहार में मुस्लिम आबादी 17.7% है और लगभग 60 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। 40 सीटों पर मुस्लिम मतदाता 25% से अधिक हैं।

🔍 प्रमुख तथ्य: आरफा खानम शेरवानी

  • पद: द वायर की वरिष्ठ संपादक
  • जन्म: 1 नवंबर 1980, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश
  • शिक्षा: पीएचडी (जामिया मिलिया इस्लामिया)
  • पुरस्कार: चमेली देवी जैन पुरस्कार (2019), JSK फेलोशिप (2024)

⚖️ चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल

आरफा खानम शेरवानी का यह सवाल चुनाव आयोग की निष्पक्षता और सक्रियता पर गंभीर संदेह उठाता है। आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले नेताओं के खिलाफ समय पर कार्रवाई न होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है।

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