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29 अगस्त 2025
📰नई दिल्ली
📰खास रिपोर्ट: मोदी के बाद अब आरएसएस
प्रमुख मोहन भागवत का बयान —"इस्लाम
भारत में है और रहेगा|
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में कहा:
“इस्लाम जब भारत में आया, तभी से यह इस मिट्टी का हिस्सा है और आगे भी रहेगा। इस्लाम नहीं रहेगा—यह सोच हिंदू सोच नहीं है। हिंदू सोच ऐसी नहीं होती। दोनों ओर यह विश्वास बनेगा तभी संघर्ष खत्म होगा। पहले यह मानना होगा कि हम सब एक हैं।”
प्रमुख बिंदु:
Serial | विषय | विवरण |
---|---|---|
1 | धार्मिक समावेशिता का संदेश | इस्लाम को भारत का हिस्सा मानना और संघर्ष खत्म करने के लिए भरोसा ज़रूरी बताना। |
2 | राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएँ | मुस्लिम नेताओं में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोग सकारात्मक, वहीं कुछ विपक्षी आलोचनात्मक संदेश देते दिखे। |
3 | समावेश और उत्तरदायित्व | हिंदू विचारधारा में संवाद, विविधता और सह-अस्तित्व पर बल। इस्लाम, हिंदू और अन्य सभी का सम्मान ज़रूरी। |
अन्य प्रतिक्रियाएँ:
- Deccan Herald ने उद्धृत किया कि भागवत ने कहा: “हिंदू सोच इस्लाम खत्म होने की कल्पना नहीं करती… संघ किसी पर धार्मिक आधार पर हमला करने में विश्वास नहीं रखता।”
- Livemint में यह भी लिखा गया कि भागवत ने “infiltration” यानी घुसपैठ को समस्या बताया, और कहा कि मुसलमान भी हमारे ही नागरिक हैं जिन्हें रोजगार व सम्मान मिलना चाहिए।
विश्लेषण:
मोहन भागवत का यह बयान सामाजिक और राजनीतिक रूप से एक समावेशी दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
उनका मानना है कि यदि हम सबको “एक” के नजरिए से देखें—ना कि विभाजन की राह पर—तो समाज में भरोसा और शांति बन सकती है।
लेकिन सवाल यह है—क्या यह संदेश ज़मीनी स्तर पर भी उतरेगा? खासकर तब, जब:
- धार्मिक असहिष्णुता का वातावरण बना हुआ हो,
- राजनीतिक रणनीतियाँ विभाजन पर आधारित हों,
- समाज में कमज़ोर वर्गों को लेकर द्वैमासिक भावनाएं हों।
भागवत ने एक सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन उन्हें अपने वक्तव्यों के साथ व्यवहारिक नीति और संवाद का विस्तार करना होगा। तभी उनकी बात समाज में घुल सकेगी।
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