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मोहन भागवत का बड़ा बयान: "इस्लाम भारत में रहेगा, हिंदू सोच सबको जोड़ने वाली है"

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मोदी के बाद RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान| इस्लाम भारत में है और रहेगा"ा | RSS प्रमुख ने कहा: हिंदू सोच सबको साथ लेकर चलती है" | मोहन भागवत बोले – इस्लाम रहेगा भारत में" | मोहन भागवत का बड़ा बयान: |समझ गया भाई 👍

📰Times Watch - दम तोड़ते सच को बचाने की कोशिश,

29 अगस्त 2025

📰नई दिल्ली 

📰खास रिपोर्ट: मोदी के बाद अब आरएसएस 

प्रमुख मोहन भागवत का बयान —"इस्लाम 

भारत में है और रहेगा

राहुल गांधी का आरोप गंभीर है यह सिर्फ़ राजनीति नहीं, बल्कि जनता के वोट का सवाल है। लोकतंत्र में हर वोट पवित्र है, और यदि उसमें गड़बड़ी है तो जांच ज़रूरी है। EC की सफाई पर सवाल चुनाव आयोग ने कहा कि राहुल गांधी को एफिडेविट देना होगा। राठी का सवाल: “डेटा तो खुद EC का है, फिर राहुल से सबूत क्यों मांगे जा रहे हैं?” भाजपा नेताओं ने भी कई बार वोटर डेटा पर सवाल उठाए, लेकिन उनसे एफिडेविट नहीं मांगा गया।https://rizwanshort.blogspot.com/2025/08/blog-post_0.html

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में कहा:

“इस्लाम जब भारत में आया, तभी से यह इस मिट्टी का हिस्सा है और आगे भी रहेगा। इस्लाम नहीं रहेगा—यह सोच हिंदू सोच नहीं है। हिंदू सोच ऐसी नहीं होती। दोनों ओर यह विश्वास बनेगा तभी संघर्ष खत्म होगा। पहले यह मानना होगा कि हम सब एक हैं।”

RSS प्रमुख मोहन भागवत इस्लाम और हिंदू सोच पर बोलते हुए

प्रमुख बिंदु:

Serialविषयविवरण
1धार्मिक समावेशिता का संदेशइस्लाम को भारत का हिस्सा मानना और संघर्ष खत्म करने के लिए भरोसा ज़रूरी बताना।
2राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएँमुस्लिम नेताओं में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोग सकारात्मक, वहीं कुछ विपक्षी आलोचनात्मक संदेश देते दिखे।
3समावेश और उत्तरदायित्वहिंदू विचारधारा में संवाद, विविधता और सह-अस्तित्व पर बल। इस्लाम, हिंदू और अन्य सभी का सम्मान ज़रूरी।

अन्य प्रतिक्रियाएँ:

  • Deccan Herald ने उद्धृत किया कि भागवत ने कहा: “हिंदू सोच इस्लाम खत्म होने की कल्पना नहीं करती… संघ किसी पर धार्मिक आधार पर हमला करने में विश्वास नहीं रखता।”
  • Livemint में यह भी लिखा गया कि भागवत ने infiltration यानी घुसपैठ को समस्या बताया, और कहा कि मुसलमान भी हमारे ही नागरिक हैं जिन्हें रोजगार व सम्मान मिलना चाहिए।

विश्लेषण:

मोहन भागवत का यह बयान सामाजिक और राजनीतिक रूप से एक समावेशी दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
उनका मानना है कि यदि हम सबको “एक” के नजरिए से देखें—ना कि विभाजन की राह पर—तो समाज में भरोसा और शांति बन सकती है।

लेकिन सवाल यह है—क्या यह संदेश ज़मीनी स्तर पर भी उतरेगा? खासकर तब, जब:

  • धार्मिक असहिष्णुता का वातावरण बना हुआ हो,
  • राजनीतिक रणनीतियाँ विभाजन पर आधारित हों,
  • समाज में कमज़ोर वर्गों को लेकर द्वैमासिक भावनाएं हों।

भागवत ने एक सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन उन्हें अपने वक्तव्यों के साथ व्यवहारिक नीति और संवाद का विस्तार करना होगा। तभी उनकी बात समाज में घुल सकेगी।



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