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मोदी जापान में: वहीं जगह जहां नेहरू की 1957 यात्रा और कसीदे गूंजे थे

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मोदी जी जापान में, वहीं धरती जो नेहरू जी की तारीफ से गूँजी थी | डॉ. मिज़ोकामी ने कहा था—| जिस देश के नेता पंडित नेहरू थे, उस देश की संस्कृति और भाषा क्यों न सीखी जाए।” | नेहरू सिर्फ भारत के नहीं, पूरी दुनिया के लिए लोकतंत्र और मानवीय मूल्यों के प्रतीक थे। | नेहरू जी का ऐतिहासिक जापान दौरा (1957) |समझ गया भाई 👍

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30 अगस्त 2025

📰नई दिल्ली

डॉ. मिज़ोकामी ने कहा था—

  • “जिस देश के नेता पंडित नेहरू थे, उस देश की संस्कृति और भाषा क्यों न सीखी जाए।”

  • “नेहरू सिर्फ भारत के नहीं, पूरी दुनिया के लिए लोकतंत्र और मानवीय मूल्यों के प्रतीक थे।”

मोदी जी जापान में , वही धरती जो कभी नेहरू जी की तारीफों से गूंजी थी,


टोक्यो/नई दिल्ली (29 अगस्त 2025): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय जापान में हैं — वही देश जहाँ पद्मश्री हिंदी–पंजाबी भाषाविद् डॉ. तोमियो मिज़ोकामी ने नेहरू जी की अमिट छवि और व्यापक आदर की बात कही थी। यह वही धरती है जहाँ नेहरू जी ने 1957 में जापान की जनता के बीच शांति, एशियाई एकता और लोकतंत्र की बातें फैलायी थीं।


नेहरू जी का ऐतिहासिक जापान दौरा (1957)

  • 1957 में नेहरू जी टोक्यो पहुंचे, जहाँ उन्हें हजारों जापानी नागरिकों ने झंडों और फूलों से सम्मानित किया। बातचीत और भाषणों में उन्होंने शांति, लोकतंत्र और एशियाई एकता पर बल दिया।
  • हिरोशिमा में नेहरू जी ने परमाणु हथियारों के विरुद्ध अपनी आवाज़ बुलंद की और युद्ध के दर्द को ख़त्म करने का संदेश दिया।
    1957 में हिरोशिमा के युद्ध स्मारक पर नेहरू जी शांति संदेश देते हुए


डॉ. मिज़ोकामी की तारीफ (समयांतराल)

डॉ. मिज़ोकामी ने साझा किया:

  • “जिस देश के नेता पंडित नेहरू थे, उस देश की संस्कृति और भाषा सीखना क्यों न गर्व की बात हो?”
  • साथ ही उन्होंने नेहरू की दूरदर्शिता और मानवतावाद का ज़िक्र करते हुए उन्हें लोकतंत्र और स्वतंत्रता के प्रतीक की तरह माना।

आज का विडंबनापूर्ण दृश्य

वही महारथी नेहरू, जिन पर देश में राजनीतिक कटाक्ष बढ़ता रहा, जापान में सम्मान और आदर की मिसाल बने रहे
आज मोदी जी बुलेट ट्रेन की सवारी कर रहे हैं, वहीं कुछ दशक पहले नेहरू जी ने एशियाई एकता और शांति की नींव रखी थी।

इतिहास कहता है— “नेता बदलते रहे, लेकिन असली कद वही है, जिसे दुनिया समय और सम्मान के साथ सलाम करती है।”


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