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26 अगस्त 2025
📰दिल्ली की राजनीती का बदलता चैहरा
"जैसी करनी वैसी भरनी" उपराजयपाल की घटती भूमिका पर उठे सवाल
नई दिल्ली — दिल्ली की राजनीति हमेशा से केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव की गवाह रही है। अरविंद केजरीवाल सरकार के दौर में उपराज्यपाल (LG) की भूमिका अक्सर विवादों में रही। उन्हें बार-बार ऐसे कदम उठाते देखा गया, जिससे यह संदेश जाता था कि वे मुख्यमंत्री और कैबिनेट से ऊपर "बॉस" की तरह काम कर रहे हैं।
केजरीवाल सरकार ने कई बार आरोप लगाया की एलजी जनता द्वारा चुनी गई सरकार के फैसलों में दखल दे कर प्रशाशनिक टकराओ को जनम देते हैं, यही वजह रही की अक्सर दिल्ली की सियासत एलजी बनाम मुख्यमंत्री में रहती थी,
लेकिन अब परिदृश्य बदल गया है। केंद्र में बीजेपी सरकार की मजबूत पकड़ और दिल्ली में आप सरकार की घटती राजनीतिक ताक़त के बीच उपराज्यपाल का वही प्रभाव दिखाई नहीं देता। वे अब राजनीतिक फैसलों के केंद्र में कम और महज औपचारिकता निभाने वाले अधिकारी के रूप में अधिक देखे जाते हैं।
राजनीतिक हलकों में इसे "जैसी करनी वैसी भरनी" के तौर पर देखा जा रहा है। जो पद पहले "ताक़त और हस्तक्षेप" का प्रतीक माना जाता था, आज वही पद पीछे खड़े रहकर सिर्फ़ उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित होता दिख रहा है।
विश्लेषण
विशेषज्ञ मानते हैं कि दिल्ली की राजनीति में यह बदलाव सत्ता संतुलन की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। जहाँ पहले टकराव और बयानबाज़ी थी, वहीं अब "चुप्पी और सीमित भूमिका" हावी है।
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