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ट्रंप को अमेरिकी जनता का बड़ा झटका! रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार, डेमोक्रेट्स ने संसद के दोनों सदनों पर किया कब्जा
4 नवंबर 2026 | विशेष रिपोर्ट
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों में नियंत्रण हासिल कर लिया है। इन नतीजों को ट्रंप की नीतियों के खिलाफ अमेरिकी मतदाताओं की बड़ी नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है।
दोनों सदनों में बदला सत्ता का समीकरण
अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने वॉशिंगटन की राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को पीछे छोड़ते हुए बहुमत हासिल किया है।
सीनेट और प्रतिनिधि सभा पर डेमोक्रेट्स के नियंत्रण का मतलब है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अब अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में पहले जैसी आसानी नहीं होगी।
टेक्सास और दूसरे रिपब्लिकन गढ़ों में भी उलटफेर
इस चुनाव की सबसे बड़ी बात यह रही कि डेमोक्रेट्स ने उन राज्यों में भी महत्वपूर्ण जीत दर्ज की, जिन्हें लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।
टेक्सास में जेम्स तालारिको ने रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन को हराकर सीनेट की सीट जीत ली। दक्षिण कैरोलिना और कंसास जैसे राज्यों में भी डेमोक्रेट्स की जीत ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया।
कंसास में करीब एक सदी बाद डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनेट में वापसी भी इस चुनाव के ऐतिहासिक नतीजों में शामिल है।
आखिर ट्रंप से क्यों नाराज हुए अमेरिकी मतदाता?
चुनाव परिणामों के पीछे कई बड़े मुद्दों को जिम्मेदार माना जा रहा है। इनमें सबसे प्रमुख हैं:
- महंगाई और महंगा जीवन: अमेरिका में रोजमर्रा की चीजों, ईंधन और रहने के खर्च को लेकर मतदाताओं में नाराजगी रही।
- ईरान युद्ध: ईरान के साथ युद्ध और उससे पैदा हुई आर्थिक अनिश्चितता ने भी चुनाव को प्रभावित किया।
- सरकारी कामकाज: ट्रंप प्रशासन की नीतियों और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा।
- स्थानीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन: कई ऐसे उम्मीदवार भी चुनाव हार गए जिन्हें ट्रंप का खुला समर्थन हासिल था।
क्या अब ट्रंप की मुश्किलें बढ़ेंगी?
डेमोक्रेट्स के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने के बाद ट्रंप प्रशासन के लिए आने वाले दो साल चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
संसद में डेमोक्रेट्स अब सरकार के विधायी प्रस्तावों को रोकने, प्रशासनिक फैसलों की जांच करने और सरकारी अधिकारियों को जवाबदेह बनाने की अधिक ताकत रखते हैं।
हालांकि, चुनाव में हार का मतलब यह नहीं है कि ट्रंप को राष्ट्रपति पद छोड़ना होगा। उनका कार्यकाल जारी रहेगा और राष्ट्रपति के पास अपने संवैधानिक अधिकार, जिसमें वीटो की शक्ति भी शामिल है, बने रहेंगे।
2028 के राष्ट्रपति चुनाव पर भी पड़ेगा असर?
इन नतीजों का असर केवल मौजूदा अमेरिकी संसद तक सीमित नहीं रह सकता। 2028 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले डेमोक्रेटिक पार्टी को नई राजनीतिक ऊर्जा मिल सकती है।
दूसरी ओर रिपब्लिकन पार्टी के सामने अपने मतदाताओं का भरोसा दोबारा जीतने की चुनौती होगी। हालांकि अभी से 2028 के चुनाव का परिणाम तय मानना जल्दबाजी होगी।
बड़ा सवाल
क्या अमेरिकी मतदाताओं ने ट्रंप की नीतियों को नकारना शुरू कर दिया है? क्या यह नतीजा 2028 में रिपब्लिकन पार्टी के लिए और बड़ी चुनौती बनने वाला है? आने वाले दो साल अमेरिकी राजनीति की दिशा तय करने में अहम होंगे।

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